ऊधमसिंह नगर के किच्छा से कांग्रेस विधायक तिलकराज बेहड़ कभी कांग्रेस में स्वास्थ्य मंत्री हुआ करते थे पर 10 साल के बाद 2022 में पुनः किच्छा से विधायक बनने के बाद भले ही राज्य में कांग्रेस की सरकार ना बन पाई हो पर किच्छा विधायक तीन सालों में धरना मंत्री ज़रूर बनते दिख रहे हैं। और वो यूँ कि पिछले तीन सालों में विधायक तिलकराज बेहड़ 12 बार से अधिक बार धरना प्रदर्शन कर चुके हैं कभी सरकार के खिलाफ तो कभी प्रशासन के खिलाफ तो कभी पुलिस के खिलाफ। क्या इसे उनकी राजनीतिक जमीन को जिन्दा रखने से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
आज रुद्रपुर में किच्छा विधायक तिलकराज बेहड़ नें जिले की पुलिस और कप्तान के खिलाफ एक बार फिर धरना दिया जहाँ वो खुद अपनी पोल खोलते भी दिखे। जब तिलकराज बेहड़ नें ऊधमसिंह नगर के पूर्व एसएसपी डॉ मंजूनाथ टीसी की तारीफ की जबकि पिछले साल किच्छा विधायक नें ना केवल पूर्व एसएसपी के खिलाफ धरना दिया था बल्कि वहीं उनके खिलाफ सदन में भी मुद्दा उठाया था पर किच्छा विधायक आज उन्हीं एसएसपी का गुणगान करते दिखे वहीं उसके उलट सितम्बर 2024 में जब जिले की कमान एसएसपी मणिकांत मिश्रा नें संभाली थी और उनकी अपराधियों को लेकर सख्त कार्यवाही को लेकर तत्कालीन DGP अभिनव कुमार के सामने एक कार्यक्रम में खुल कर तारीफ की थी पर आज महज चंद महीनों में अपनी राजनीती चमकाने के लिए पुनः जिले की पुलिस और कप्तान के खिलाफ धरने पर बैठ गए।
इसे अगर ऐसे देखें तो ये कहना गलत नहीं होगा की किच्छा विधायक केवल अपनी राजनीती को जिन्दा रखने के लिए आए दिन केवल धरने करते दिखाई देते हैं जबकि 2 दिन पूर्व ही किच्छा विधायक तिलकराज बेहड़ नें अपने सोशल मीडिया पेज पर मुख्यमंत्री धामी के साथ मुलाक़ात की तस्वीरें भी शेयर की थी जहाँ वो क्षेत्र की परियोजनाओ और विकास के लिए मुख्यमंत्री धामी से चर्चा करते दिखे थे। अब सवाल ये उठता है कि क्यों नहीं मुख्यमंत्री से मुलाक़ात के दौरान किच्छा विधायक नें ओवरलोड डम्पर के मुद्दे को नहीं उठाया? क्या ये धरना केवल उनकी राजनीती को लोगों के बीच चमकाने के लिए किया गया? क्या हर बार पुलिस और प्रशासन के खिलाफ धरने देने से अधिकारीयों और विभागो का मनोबल नहीं टूटता। क्या किच्छा विधायक ये भूल जाते हैं कि उनके मंत्री रहते और कांग्रेस की सरकार के समय ओवरलोड डंपर नहीं चलते थे? तब क्यों नहीं अपनी सरकार के रहते कोई प्रभावी नीति नहीं बनाई गई और वर्तमान किच्छा विधायक और तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री नें इस विषय पर अपनी सरकार में आवाज़ नहीं उठाई? सवाल कई हैं पर 10 साल के राजनीतिक वनवास के बाद 2022 में विधायक बनने के बाद 3 सालों में किच्छा विधायक केवल धरना देते ही दिखते हैं। और क्षेत्र में विकास के नाम पर बस रोडो के ऊपर गेट बनाते ही दिखाई देते हैं।
आज हुए धरने प्रदर्शन में किच्छा विधायक जहाँ एक तरफ जहाँ पूर्व एसएसपी की तारीफ करते दिखे तो वहीं वर्तमान एसएसपी मणिकांत मिश्रा पर ऊँगली उठाते दिखे। जबकि वर्तमान एसएसपी नें जबसे जिले का चार्ज संभाला है तब से ना केवल 23 अपराधियों को मुठभेड़ में लंगड़ा किया है बल्कि वहीं नशे के खिलाफ एक के बाद एक कई कड़े प्रहार नशा तस्करों पर किए जा रहे हैं। पर किच्छा विधायक केवल अपने अहम की संतुष्टि ना हो पाने के चलते (क्योंकि एसएसपी मणिकांत मिश्रा उनसे नहीं मिले) वर्तमान एसएसपी सहित पूरे जिले की पुलिस विभाग पर ऊँगली उठाते दिखे। और जो पुलिस कर्मचारी आम आदमी की सुरक्षा और अपराधियो की धर पकड़ में लगनी चाहिए थी वो आज आधे दिन कड़ी धूप और गर्मी में प्यासे खड़े केवल किच्छा विधायक और धरना मंत्री की सुरक्षा में ही लगी रही। ये कहना गलत नहीं होगा हर बार धरना मंत्री के धरने देने से ना केवल पुलिस का बल्कि अन्य विभागों के कर्मचारियों का मनोबल भी कमजोर होता है।



